भारत माता की जय बोलने का अधिकार उन्हें कदापि नही है...
जो भारत माता के श्रृंगार का धन चुराते हैं...
विकास के बजट के रुपये का केवल १५ पैसे ही गाँव तक जाता है...
गाँव के लाभार्थी का पैसा लाभार्थी तक जाते - जाते १५ पैसे ही रह जाता है...
अब समय आ गया है मनमोहन सिंह जी देश की यह जनता यह जानना चाहती है... ८५ पैसा कहाँ जा रहा है...
आइये मिलकर साथ चलें, आन्दोलन को तेज़ करें...
जब देश के प्रधानमंत्री यह स्वीकार करें... कि विकास के नाम पर खर्च होने वाला १ रुपया नीचे तक मात्र ८५ पैसा पहुँचता है...
तो फिर कैसे समृद्ध बनेगा भारत ?
कैसे होगा भारत निर्माण ?
गाँव उजड़ रहे हैं...
१५ पैसे में गाँव कब तक जिंदा रहेंगे ?
जो भारत माता के श्रृंगार का धन चुराते हैं...
...देवी प्रसाद गुप्ता
विकास के बजट के रुपये का केवल १५ पैसे ही गाँव तक जाता है...
...राजीव गाँधी प्रधानमंत्री, १९८६
विकास के नाम पर खर्च होने वाला रुपया गाँव तक १० से १५ पैसे ही पहुच पाता है....
...अटल बिहाई बाजपेयी, २०११
गाँव के लाभार्थी का पैसा लाभार्थी तक जाते - जाते १५ पैसे ही रह जाता है...
...राहुल गाँधी, २००७
अब समय आ गया है मनमोहन सिंह जी देश की यह जनता यह जानना चाहती है... ८५ पैसा कहाँ जा रहा है...
"८५ पैसा ढूंढो आन्दोलन"
आइये मिलकर साथ चलें, आन्दोलन को तेज़ करें...
जब देश के प्रधानमंत्री यह स्वीकार करें... कि विकास के नाम पर खर्च होने वाला १ रुपया नीचे तक मात्र ८५ पैसा पहुँचता है...
तो फिर कैसे समृद्ध बनेगा भारत ?
कैसे होगा भारत निर्माण ?
गाँव उजड़ रहे हैं...
१५ पैसे में गाँव कब तक जिंदा रहेंगे ?
Aage badho aur maango 85 paise ka hisab
ReplyDeletebahut door ki soch hai, har bhartiy ko is aandolan me bhaagidaari karni chahiye........aisa mera maaannna hai............
ReplyDeleteकाला धन उस व्यस्था की कोख से पैदा होता है जिसे राजीव तथा अटल ने खुलेआम बताया था कि विकास का एक रुपया नीचे केवल पन्द्रह पैसा ही पहुँचता है हमने पूछा ही नही पचासी पैसा कहाँ जाता है ? काला धन वापस आये उससे पहले जरुरी है कि उसकी कोख पर चोट हो अन्यथा वह फिर काला हो जायेगा !
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