Sunday, February 2, 2014

कहाँ ले जायेँगे ये बेईमान . . . ?

देश के वातावरण को लगातार गरमाने की कोशिश मे जुट गये है ऐशगाहो के भोगी सौदागर . . . कैसे मी किसी भी तरीके से उस कुरसी को हथियाना है जिसमे बैठने के बाद पूरी मौज के लिये राजकोष जिसमे जनता की गाढी कमाई का धन होता हॅ का पैसा इनके लिये आसानी से मिलता है . कहाँ है शुचिता की बात ? क्या ये ढकोसला लोकतँत्र देश को किसी अँधेरी खोह की ओर लिये जा रहा है ? तो फिर . . . चुनाव प्रणाली पर चरचा शुरु हो ।

Friday, January 31, 2014

कब तक मौज करेँगेँ ऐश कैश के भोगी नेता?

शरद पँवार की पार्टी ने जो रुख बनाया है ये एक शर्मनाक चेहरा है उस घटिया लोकतँत्र का जिसके सहारे ऍश कैश के लुटेरे सौदागर कैसे भी पावर अपने बाडे मे बँद रखना चाहते हैँ . ऐन सी पी का एक नेता मोदी की प्रसँशा कर आहट की अगवानी करता है तो दूसरा लालबत्ती बँगला सुरक्षित बनाये रखने की कला बाजी दिखा रहा है खुद पँवाँर अपने को जय पराजय के खतरो से बचा कर प्यादो की भोगी भविष्य की नीव पक्की करने मे जुट गये है , कबतक मखोल होगा भारत ते साथ ?

Monday, January 27, 2014

पागल कौन है बताये देश के ग्रहमँत्री

कहाँ हैं देश के ग्रहमंत्री शिंदे जी? क्या उन्होने राज ठाकरे का बयान जो मनसे की सभा में दिया गया उसे नहीं सुना? और उसके बाद मनसे की अराजकता पर मौन क्यों? क्या कह पायेंगे वो कि पागल कौन है? ग्रहमँत्री को साफ करना चाहिये कि सार्वजनिक गुण्डागर्दी पर उनके मौन के पीछे कारण क्या है?

Saturday, January 25, 2014

आइये एक दिन और मनाया जाये

कोई पागल कह रहा है, कोई राक्षस कह रहा है, तो कोई राखी सावँत से तुलना करने की बद्दिमागी दिखा रहा है...
आखिर क्या ऐसा कर दिया अरविँद केजरीवाल ने कि चौबीस घँटे बजने वाले भोपू इतना कुपित हो गये?
हाँ उसने ऐश गाहो पर पत्थर फेकने की गलती कर दी है...
देखे कबतक टिकता है गण के सामने तँत्र को घुटने टिकवाने की जुर्रत करने वाला?
बधाई मँगलकामनाये गणतँत्र दिवस की...

Thursday, January 23, 2014

तोड़ो कारा तोड़ो

बदलाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है...
ये निरंतर चलती रहती है जहाँ बदलाव रुकते है वही जड़ता व्यापती है।
जडता को तोड़ना बडा खतरनाक भी हो सकता है और रोमांचकारी भी...
बडा प्रश्न है कि बदलाव पर हमारी पकड़ है या नहीं यदि है तो कितनी... जड़ता को तोड़ने का काम शुरु है शोर तो होगा...
देखें कितने लौग इंडिया का ऐशपाश तोड़ भारत के साथ खड़े होते हैं...

Tuesday, January 21, 2014

दिल्ली के दर्द को न्याय चाहिये...

दिल्ली के लेफ्टीनेंट जनरल ये फैसला दो दिन पहले भी ले सकते थे।
क्या ये जरुरी था कि अड्डो की कमाई से ऐश करने वाले अफसरो को बचाने के लिये दिल्ली की आबादी कोअराजकता मे ढकेला जाता? आखिर वे कौन से कारण है जिनके कारण वेश्यालय के सँरक्षको को सँरक्षण दिया जा रहा है?
दिल्ली को अराजकता की आग मे झोकन की पूरी घटना की जाँच न्यायिक होनी चाहिये...

ये कैसा तमाशा करवा रहे है शिंदे

एक . . . . . . ? व्यक्ति जो ढकोसला लोकतँत्र के कारण इस देश का ग्रहमँत्री बन बैठा है के कारण पूरी दिल्ली मे माहौल अराजक होता जा रहा है...
लाखो लोग अपने काम काज के लिये नहीं जा पा रहे हैं...
क्या परेशानी है शिंदे को ऐसे पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही करने मे जो अवैध अड्डों के सँरक्षक है?
...बोलिये आप भी अन्यथा देर हो जायेगी

Monday, January 20, 2014

कहाँ तक जायेंगे ये कनाटी कल्चर के लोग

सुनँदा थरुर की मौत ये बताती है कि देश का तथाकथित अभिजात्य किस सँसार मे जी रहा है।
कैसी जीवन शैली हमारे जीवन मे ना केवल सामाजिक बिखराव के बीज बो रही है बल्कि ऐसा जहर भी घोल रही है जहाँ आगे का रास्ता बँद पाया जाता है और फिर...
सुनँदा...

ये घटिया लोकतँत्र का नाटक...

मँत्रियो को दुत्कारते पुलिस अफसर...

मुख्यमँत्री की शिकायत के बावजूद अफसरो का तबादला तक नहीं...
क्या कहने हैं?


इसे कहते हैं असली राजनीति का ड्रामा...


कौन हैं वे शक्तिशाली लोग जो भारत को ठगने के लिये फिर बिसात बिछाने मे जुट गये हैं... 


तो फिर ठगे जायेँगे हम...


जी नकारा गिनती मे नाम मात्र के वोट पाकर माननीय बन जाना आसान है...


चाहे फिर जमानत ही क्यो ना जब्त हो गयी हो...

Sunday, January 19, 2014

आज का विचार

गाँव गरीब गाय गँगा गीता...
इनसे भारत जीता...
कल की ओर कदम बढाओ...
साथी छोडो जो कल बीता...
...देवी प्रसाद गुप्ता