Sunday, February 2, 2014

कहाँ ले जायेँगे ये बेईमान . . . ?

देश के वातावरण को लगातार गरमाने की कोशिश मे जुट गये है ऐशगाहो के भोगी सौदागर . . . कैसे मी किसी भी तरीके से उस कुरसी को हथियाना है जिसमे बैठने के बाद पूरी मौज के लिये राजकोष जिसमे जनता की गाढी कमाई का धन होता हॅ का पैसा इनके लिये आसानी से मिलता है . कहाँ है शुचिता की बात ? क्या ये ढकोसला लोकतँत्र देश को किसी अँधेरी खोह की ओर लिये जा रहा है ? तो फिर . . . चुनाव प्रणाली पर चरचा शुरु हो ।

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