Monday, January 20, 2014

कहाँ तक जायेंगे ये कनाटी कल्चर के लोग

सुनँदा थरुर की मौत ये बताती है कि देश का तथाकथित अभिजात्य किस सँसार मे जी रहा है।
कैसी जीवन शैली हमारे जीवन मे ना केवल सामाजिक बिखराव के बीज बो रही है बल्कि ऐसा जहर भी घोल रही है जहाँ आगे का रास्ता बँद पाया जाता है और फिर...
सुनँदा...

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