सुनँदा थरुर की मौत ये बताती है कि देश का तथाकथित अभिजात्य किस सँसार मे जी रहा है।
कैसी जीवन शैली हमारे जीवन मे ना केवल सामाजिक बिखराव के बीज बो रही है बल्कि ऐसा जहर भी घोल रही है जहाँ आगे का रास्ता बँद पाया जाता है और फिर...
सुनँदा...
कैसी जीवन शैली हमारे जीवन मे ना केवल सामाजिक बिखराव के बीज बो रही है बल्कि ऐसा जहर भी घोल रही है जहाँ आगे का रास्ता बँद पाया जाता है और फिर...
सुनँदा...
No comments:
Post a Comment